स्वर्णभूमि - एक अलग ऩज़र से

रुक जाइये... आगे बढ़ने से पहले इन तस्वीरों को ज़रा गौर से देख लीजिए। अगर आपसे कहा जाए कि ये तस्वीरें थाईलैंड की हैं तो आप एकबारगी यकीन नहीं करेंगे। यकीन करने की कोई वजह भी नहीं, क्योंकि थाईलैंड की जो छवि आपके सामने रखी जाती है उसमें दो ही रंग रहते हैं- भागती-दौड़ती रोशनियों से जगमग और ज़िन्दगी से भरपूर शहर बैंकॉक, और मस्ती के शहर पातया का समुद्र तट और वॉकिंग स्ट्रीट। ट्रेवल एजेंट के पास थाईलैंड का टूर बुक करवाने जाएंगे तो वो जो भी पैकेज देगा उसमें बैंकॉक और पातया ही शामिल होंगे। मानो, थाईलैंड जाने का मतलब सिर्फ यही दो ठिकाने हों। लेकिन असल में थाईलैंड इसके अलावा भी बहुत कुछ है... एक बहुत प्यारा देश जिसे थोड़ा नज़दीक से और अलग नज़र से देखेंगे तो इसे प्यार करने लगेंगे।

घुमक्कड़ी के शौक़ की अगली कड़ी में इस बार मौका कुछ ऐसा बना कि पैरों में लगे चक्के थाईलैंड के कांचनाबुरी में जाकर रुके। एक तो इस जगह का ऐतिहासिक महत्व और दूसरे यहाँ की बेदाग़ कुदरती ख़ूबसूरती.. आकर्षण ही ऐसा था कि खुद को वहाँ जाने से रोकना मुश्किल था। कांचनाबुरी राजधानी बैंकॉक से तकरीबन 120 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक प्रांत है जिसका मुख्यालय इसी नाम के एक छोटे से शहर में है। शहर छोटा है तो जाहिर है भीड़-भाड़ भी कम है, और यही इसकी ख़ासियत है। कुदरत की गोद में ताज़ी महकती हवा और थाई फूड का मज़ा लेने की तलाश में हैं तो कांचनाबुरी बेहतर विकल्प है। कवाई नदी के आस-पास बसे इस इलाक़े में ढेरों ऐसी जगह हैं जहाँ रोमांच है, सुकून है, और कुछ ऐसे नज़ारों से रू-ब-रू होने का मौका भी जो ज़िंदगीभर याद रखने के काबिल हैं। एक तरफ धान के खेतों से अटे मैदानी इलाके हैं तो दूसरी तरफ घने जंगलों से ढके पहाड़ हैं। पहाड़ों में मौजूद झरने, लाखों साल पुरानी रहस्यमयी गुफाएं और नेशनल पार्क... ये सब आपको इतना बाँध लेंगे कि वक़्त बीतने का अहसास नहीं होगा। इन मैदानों और पहाड़ों से गुजरते वक़्त नागिन की तरह बल खाती कवाई नदी आपको हर मोड़ पर स्वागत करती मिलेगी।

सफ़र डेथ रेलवे का
बैंकॉक से कांचनाबुरी का रुख करते हैं तो रोमांच का सफ़र रेलयात्रा से ही शुरू हो जाता है। जिन पटरियों पर ट्रेन चलती है उसे डेथ रेलवे कहते हैं। डेथ रेलवे इसलिए कि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब जापानी सरकार के हुक्म पर इसे थाईलैंड के बान पोंग स्टेशन से बर्मा के थान्ब्युज़यत तक कोयला ले जाने के लिए बनाया गया था तो मित्र देशों के करीब एक लाख युद्धबंदी इसे बनाने में अपनी जान गंवा बैठे थे। बेहद विषम हालत में भूखे-प्यासे रहकर उन्होंने सिर्फ छेनी-हथौड़ों की मदद से पहाड़ खोद-खोदकर यह लाइन बनाई थी। अब इस लाइन को बान पोंग से बैंकॉक के थोनबुरी स्टेशन तक बढ़ा लिया गया है, लेकिन दूसरी तरफ यह अब बर्मा न जाकर थाईलैंड के नम तोक स्टेशन तक ही जाती है। नम तोक के बाद इस लाइन के अवशेष ही मौजूद हैं।

गुजरे ज़माने में तफ़रीह
थोनबुरी स्टेशन पर ट्रेन में कदम रखते ही लगा जैसे इतिहास की किताब का कोई पन्ना आंखों के सामने आ गया हो। यूँ तो बैंकॉक से बसें भी जाती हैं, लेकिन इतिहास का हिस्सा बनने का अहसास अलग है। नम तोक का सफ़र 4.5 घंटे का है, लेकिन कांचनाबुरी तक आप 2.5 घंटे में ही पहुँच जाते हैं। वैसे, असल रोमांच कांचनाबुरी के बाद शुरू होता है। स्टेशन से थोड़ा बाहर निकलते ही मंद चाल से ट्रेन लोहे के पुल से गुजरती है तो जैसे कोई टाइम मशीन आपको 70 साल पीछे ले जाती है। यह वही पुल है जिसके बारे में कई कहानियां लिखी गई हैं। इसके बाद पहाड़ शुरू हो जाते हैं। आगे नम तोक तक रास्ते में एक और रोमांच से आप दो-चार होते हैं जब ट्रेन एक जर्जर पुल से गुजरती है.. या यूँ कहें कि सरकती है। काँपता हुआ पुल और दोनों तरफ गर्जना करती कवाई नदी... लगता है अब गिरे कि तब गिरे। और जब तक यह पुल पार होता है तब तक अहसास हो चुका होता है कि डर के आगे जीत किसे कहते हैं।

सात झरनों का संगीत
कांचनाबुरी के आस-पास कई नेशनल पार्क हैं, लेकिन इनमें सबसे नज़दीक इरावन नेश पार्क है जो वहां से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर है। इस पार्क में रोमांच-प्रेमियों के लिये कई ट्रेकिंग रूट तो हैं ही, वे रह के पंछियों से भी मुलाक़ात कर सकते हैं। लेकिन यहाँ की असल ख़ूबसूरती वो सात झरने हैं जिन्हें देखने के लिये पहाड़ी रास्ते पर डेढ़ किलोमीटर चलना पड़ता है। नेशनल पार्क से होकर बहने वाली मे क्लोंग नदी अपने रास्ते में ये झरने बनाती चलती है। यह एक तरह की नेचर वॉक है जिसमें पहाड़ों पर चढ़ते-उतरते सातवें झरने तक जाना होता है। अगर आपका स्टेमिना अच्छा है तो डेढ़ घंटे में सातवें झरने तक पहुंच सकते हैं। शांत निर्मल जल वाली मे क्लोंग नदी के ये झरने सारी थकान मिटाकर आपको तर-ओ-ताज़ा करने की काबिलियत समेटे हैं।

इरावन पार्क जाने के लिये टैक्सी के अलावा ट्रेन भी अच्छा साधन है। यह नम तोक स्टेशन के नज़दीक है। मे क्लोंग नदी में नौका की सवारी करके भी पार्क तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन यह महंगा पड़ता है। पार्क के बाहर खाने-पीने की कई अच्छी जगह हैं। विदेशी सैलानियों को यहाँ एंट्री के लिये 200 बाट चुकाने होते हैं। हाँ, टिकट संभालकर रखें क्योंकि इसमें लवा गुफा की एंट्री भी शामिल है।

जहां कभी आदिमानव रहता था
लवा गुफा इरावन पार्क से क़रीब 25 किलोमीटर दूर है। लाखों साल पुरानी और आधा किलोमीटर लंबी इस गुफा में कभी इनसान रहते थे। आज यह गुफा छतों से झूलते और फ़र्श से निकलते कैल्शियम के स्तंभों की वजह से ख़ूबसूरती का बेमिसाल नमूना है। बल्बों की पीली रोशनी जब कहीं झक सफ़ेद और कहीं मटमैले स्तंभों पर पड़ती है तो लगता है किसी मायावी दुनिया में विचरण कर रहे हैं। गुफा तक जाने के लिये आधा किलोमीटर की चढ़ाई है। अगर यहाँ से पहले इरावन पार्क होकर आये हैं तो टिकट लेने की ज़रूरत नहीं। गुफा के भीतर चार बड़े कमरे हैं या कहें कि लिविंग क्वार्टर्स हैं जो यकीनन चार बड़े परिवारों के लिये होंगे। पूरी गुफा घूमने में एक घंटा लग जाता है। भीतरी हिस्सों में ऑक्सीजन कम है, इसलिए वहां से जल्दी निकलना बेहतर है।

हेलफायर पास से गुजरते हुए
नाम ही बताता है कि यहां कभी नरक की आग से वास्ता पड़ा होगा। यह जगह नम तोक स्टेशन से उत्तर की तरफ है जहाँ से कभी डेथ रेलवे गुजरता था। यह क़ुदरती दर्रा नहीं है बल्कि युद्धबंदियों ने 75 मीटर लंबी पहाड़ी को आठ मीटर गहरे तक खोदकर रेललाइन के लिये रास्ता बनाया था। इसके लिए उन्हें मोमबत्ती की रोशनी में भी काम करना पड़ता था। पुरानी लाइन के अवशेष आज भी मौजूद हैं जो जापानी अत्याचार की कहानी कहते प्रतीत होते हैं। यह शायद वहां के माहौल का असर है कि इस दर्रे से गुज़रते वक़्त वो पुराना मंज़र जीवंत हो उठता है।

साई योक वॉटरफॉल्स
इरावन पार्क और लवा गुफा के बीच दो खूबसूरत झरने और हैं- साई योक यई और साई योक नोई। बेहद ऊंचाई से गिरते इन झरनों में नहाने का मज़ा ही अलग है। साई योक यई बड़ा झरना है और वहां जाने का टिकट लेना पड़ता है। लेकिन साई योक नोई के लिए कोई शुल्क नहीं है। हेलफायर पास से जब कांचनाबुरी के लिए लौटते हैं तो नम तोक स्टेशन के नज़दीक ही यह झरना है। यूँ तो पहाड़ की तलहटी में नहाने के लिये कुंड बना है लेकिन कुछ ऊपर चढ़कर सीधा झरने की धार में नहाने की बात ही कुछ और है। पर हाँ, ध्यान रखें कि कुछ पत्थरों पर फिसलन बहुत है। अगर नहाने का मूड नहीं है तो झरने का नज़ारा ही आँखों को ठंडक पहुंचा देगा।

और भी बहुत कुछ
मेरे पास कांचनाबुरी में दो ही दिन थे, इसलिए मैं तसल्ली से इन चार जगहों पर ही जा पाया। जो ख़ास जगह मैंने मिस की, वो है टाइगर टेम्पल। साई योक के जंगल में बसा यह मंदिर असल में वन्यजीवों का अभयारण्य है, लेकिन यहाँ रहने वाले बाघों की वजह से यह ज्यादा मशहूर है। जंगल में मिले बाघ शावकों को यहाँ पाला जाता है। बचपन से ही वे इनसान की मौजूदगी के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि दिन में जब वे बाड़े में सो रहे होते हैं तब आप उनके पास जाकर आराम से बैठ सकते हैं।

शेरों के बालों में हाथ फिराने के अनुभव के अलावा अगर पानी पर तैरते हुए शॉपिंग करने का मौका मिले तो? जाहिर है आप कहेंगे- क्यूँ नहीं! तो इसके लिए आपको रात्चाबुरी जाना होगा जो कांचनाबुरी के दक्षिण में 70 किलोमीटर की दूरी पर है। सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक यहां फ्लोटिंग मार्केट लगाती है। दुकानें नौकाओं में चलती हैं और आपको भी पतली-सी नौका में बैठकर खरीदारी करनी होती है। सारा बाज़ार पानी की गलियों पर चलता है। यह नज़ारा आपको अनायास इटली के वेनिस शहर की याद दिला जाता है जहां ज़िंदगी पानी पर दौड़ती है।
 
कम खर्च में घूमना-फिरना
1. बैंकॉक के सुवर्णभूमि एअरपोर्ट से टैक्सी के बजाय 15 बाट किराये वाली सिटीलाइन रेलसेवा का उपयोग करें। पैसेंजर हॉल के बेसमेंट से चलने वाली यह सुपरफास्ट सेवा 25 मिनट में शहर के बीचो-बीच मौजूद फाया थाई नामक स्टेशन पहुँचा देती है। यहाँ से आगे के लिए बीटीएस मेट्रो रेलसेवा ले सकते हैं।
2. मेट्रो ट्रेन बैंकॉक में यातायात का सबसे तेज़ साधन है। एक दिन का पास 120 बाट का है, चाहे कितना भी सफ़र करो। यूँ तो बसें भी खूब हैं, पर जाम में वक़्त बहुत लग जाता है। बैंकॉक दुनिया के उन शहरों में है जहाँ जाम खूब लगते हैं।
3. थाईलैंड में जगह-जगह 7-इलेवन के स्टोर हैं जहाँ हर तरह का ज़रूरी सामान सही दाम में मिल जाता है। ये स्टोर कदम-कदम पर हैं।
4. रेहडियों व स्टॉल्स पर मिलने वाला खाना ताज़ा व स्वादिष्ट तो होता ही है, पेट और जेब पर भारी भी नहीं होता। वहीं, ज़्यादातर रेस्तरांओं में बुफे सिस्टम रहता है। इसके दाम ज्यादा नहीं होते और भरपेट भोजन भी हो जाता है।

कांचनाबुरी पहुंचना और रुकना
1. बैंकॉक में तीन इंटर-स्टेट बस टर्मिनस हैं। इनमें से मो चित और साई ताई तान चल्लिंग से ही कांचनाबुरी के लिए बसें हैं जो दो घंटे में वहां पहुंचा देती हैं। वहां से साई योक अथवा नम तोक के लिए टैक्सी और मिनी बसें हैं।
2. ट्रेन सेवा थोनबुरी स्टेशन से है जो पुराने बैंकॉक में है। यहाँ से सुबह 7.45 और दोपहर बाद 1.40 पर नम तोक के लिए ट्रेन है। किराया 100 बाट है चाहे किसी भी स्टेशन तक जाएं।
3. दिनभर घूमकर शाम को बैंकॉक वापस आना चाहते हैं तो टैक्सी ले सकते हैं। लेकिन इसमें कांचनाबुरी के अलावा आस-पास का क्षेत्र शामिल कर लें।
4. कांचनाबुरी में रुकने के कई ठिकाने हैं। ज़्यादातर गेस्टहाउस हैं जो नदी किनारे बने हैं। इनका किराया बेहद कम है। अगर सुकून के साथ घूमना-फिरना चाहते हैं तो तीन-चार दिन यहाँ ज़रूर रुकें।
5. चहल-पहल से दूर एकांत में वक़्त बिताने के लिए पहाड़ी इलाके में रहें। इसके लिए साई योक अच्छी जगह है। ऐसे में कांचनाबुरी के बजाय वांग पो स्टेशन पर उतरें। यहाँ से टैक्सी लेकर पूरा इलाक़ा घूमा जा सकता है।
6. गेस्टहाउस की बुकिंग पहले करवाकर जाएं क्योंकि यह क्षेत्र यूरोपीय सैलानियों का पसंदीदा ठिकाना है और जगह मुश्किल से मिलती है। लोनली प्लेनेट और हॉस्टलवर्ल्ड जैसी कई वेबसाइट्स हैं जिन पर बुकिंग की जा सकती है।
7. दिसंबर के पहले हफ्ते में कांचनाबुरी में रिवर कवाई ब्रिज फेस्टिवल चलता है जिसमें लाइट एंड साउंड शो रहता है। शो का मज़ा लेना है तो दिसंबर की गुलाबी ठंड में जाने का प्रोग्राम बनाएं।

यह यात्रा वृतांत 'अहा ज़िंदगी' के अप्रैल अंक में प्रकाशित हुआ है।

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1 comments:

Pratibha Katiyar said...

रुक गए जी, बहुत सुन्दर यात्रा रही...