पात्तया-3 : कैबरे, थीम पार्क और एनिमल फार्म

पात्तया को इसके बिंदास तौर-तरीकों ने बेशक दुनियाभर में एक ऐसे सागरतटीय इलाक़े के रूप में लोकप्रियता दिलाई है जो युवाओं के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है, लेकिन यहां पर कितने ही ठिकाने ऐसे भी हैं जहां ख़ालिस मनोरंजन है और दिनभर की मस्ती है। अभी तक पात्तया की अपनी घुमक्कड़ी में हमने उन जगहों को छुआ जहां माहौल का अपना अंदाज़ है, और यह हम पर है कि उस माहौल में ख़ुद को हम कैसे ढालते हैं, उसे कैसे जीते हैं, कैसे महसूस करते हैं। आज पात्तया की अपनी तफ़रीह के इस अंतिम चरण में हम उन जगहों पर चलते हैं जहां पहुंचकर वहां के रंग में आपको रंगना ही पड़ेगा; आपकी मर्ज़ी नहीं वहां चलने वाली।

खो जाएं कैबरे की चकाचौंध में
पात्तया में शाम का धुंधलका छाने के साथ ही दो नए रंग घुलने लगते हैं- एल्काज़र और टिफेनी। ये दोनों डेढ़-डेढ़ घंटे के कैबरे शो हैं जिनमें पुरुष से स्त्री बन चुके युवा हिस्सा लेते हैं। थाईलैंड में लिंग परिवर्तन कराने का चलन दुनिया के किसी भी अन्य देश से कहीं ज़्यादा है। शहर में घूमते-फिरते आपको कितनी ही ऐसी लड़कियां दिखेंगी जो कभी मर्द थीं। इन्हीं मर्दाना लड़कियों के कैबरे शो हैं ये दोनों... लेकिन पेशकश का स्तर देखें तो ये दुनिया के किसी भी मनोरंजन शो को टक्कर देते हैं। बेहतरीन लाइटिंग, कॉस्ट्यूम और परफॉर्मेंस...शायद ही यहां कोई शो ऐसा होता हो जिसमें एक भी सीट ख़ाली जाती हो। सेकंड रोड पर चलने वाले इन दोनों कैबरे के रोज़ तीन-तीन शो हैं। एल्काज़र शो वयस्कों के लिए है, जिसका टिकट 600 बाट का है। स्टेज के नज़दीक वाली सीट के लिए 800 बाट देने पड़ते हैं। शो के टाइमिंग हैं- शाम 6.30, 8.00 और 9.30 बजे। 
वहीं, टिफेनी शो का लुत्फ आप परिवार के साथ भी उठा सकते हैं। यह शो 1974 में सिर्फ एक कलाकार से शुरू हुआ था जो नए साल पर दोस्तों के मनोरंजन के लिए कैबरे पेश करता था। आज आलम यह है कि दुनिया के पहले पांच एंटरटेनमेंट शो में इसे शुमार किया जाता है। इसका टिकट 500 से लेकर 800 बाट तक है और शो के टाइमिंग शाम 6.00, 7.30 और 9.00 बजे हैं। यह वही टिफेनी शो है, जिसकी तरफ से हर साल मई में मिस टिफेनी यूनिवर्स नामक सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित की जाती है और जिसमें दुनियाभर से ख़ूबसूरत कन्याएं हिस्सा लेती हैं।

परिवार के लिए भी बहुत कुछ
यदि आपको इस मंज़र से कोई परेशानी नहीं है कि ढलती उम्र के लोग अपने से आधी उम्र की लड़की के गले में बांहें डाले घूम रहे हैं, या फिर किसी बार के आगे से निकलते वक़्त दो-एक सजी-धजी मर्दाना लड़िकयां आपको छूकर हाल-चाल पूछ लेती हैं तो परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए पात्तया बेहतर गंतव्य है जहां आपको थीम पार्क, म्यूज़ियम, एनिमल फार्म और बौद्ध मंदिरों में घूमने का मौका मिल पाता है। 

सबसे पहले, आइए, नोंग नूच ट्रॉपिकल गार्डन चलते हैं। कार से जाएं तो यह पात्तया के दक्षिण-पूर्व में 15 मिनट की दूरी पर है। यह गार्डन 650 एकड़ में फैला है और यहां पूरा दिन बिताया जा सकता है। ख़ूबसूरत बागों के अलावा यहां मनमोहक झरने हैं। हाथियों के करतब भी यहां देखने को मिलते हैं। हाथियों को संगीत की धुनों पर झूमते, सूंड से ब्रश पकड़कर पेंटिंग करते और कई तरह के गेम खेलते देखकर अचंभित हुए बिना नहीं रहेंगे आप। नोंग नूच में आप साइक्लिंग, पैडल बोटिंग और स्काईवॉक का आनन्द भी ले सकते हैं। इसके अलावा, दिनभर में यहां पर चार कल्चरल शो भी होते हैं जिनमें थाई संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। यहां कुछ कैफे व रेस्तरां भी हैं। यानी, दिनभर की मनोरंजक पिकनिक के लिए उम्दा ठिकाना। टिकट है 500 बाट।

मिनी सियाम में पूरा थाईलैंड
पूरे थाईलैंड को एक ही दिन में केवल 250 बाट में देखना हो तो फिर मिनी सियाम हो आते हैं। यहां पर थाईलैंड के जाने-माने स्मारकों के छोटे-छोटे रेप्लिका हैं। इनमें एमेराल्ड बुद्ध का मंदिर, क्वाई नदी का पुल, डेमोक्रेसी मॉन्यूमेंट जैसे स्मारक शामिल हैं। थाई स्मारकों के अलावा दुनिया की अनेक मशहूर इमारतों व स्मारकों के रेप्लिका भी हैं जिनमें एफिल टावर, स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी और सिडनी का ओपेरा हाउस शामिल हैं। इन रेप्लिका के बीच से गुज़रते हुए कुछ पल के लिए आपको यह अहसास भी हो सकता है कि आप गुलिवर हैं और भटककर लिलीपुट के देश में आ गए हैं।

एलिफेंट विलेज और क्रोकोडाइल फार्म
नोंग नूच पार्क से थोड़ा पहले एलिफेंट विलेज हैं जहां आप हाथियों और उनके महावतों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी की झलक पा सकते हैं। यहां टिकट 500 बाट है। हाथियों की दिनभर की गतिविधियों देखने के अलावा हाथियों के करतब भी यहां दिखाए जाते हैं। चाहें तो एक घंटे के लिए 900 बाट में जंगली इलाक़े में हाथी की सवारी भी कर सकते हैं। और अगर रिवर राफ्टिंग का शौक़ पूरा करना है तो 1800 बाट में जंगल के बीच से गुजरती नदी में तीन घंटे के लिए हिचकोले ले सकते हैं।
क्रोकोडाइल फार्म भी पात्तया से 15 मिनट की दूरी पर है और सुबह 8.30 से शाम 6.30 तक खुलता है। यहां मगरमच्छों के अलावा जंतुओं की कई दुर्लभ प्रजातियां हैं जिनमें सफेद भालू व घोड़े शामिल हैं। मगरमच्छों के दिल दहला देने वाले शो यहां होते हैं। मैजिक शो और कई एनिमल शो भी यहां देख सकते हैं। यहां की ख़ूबसूरती इसके स्टोन पार्क में है जहां पत्थरों के बीच खिले तरह-तरह के फूल अपने पर से निगाह हटने नहीं देते। कुल मिलाकर, रोमांच व सुकून है इस जगह पर। टिकट 300 बाट का है, जबकि बच्चों के लिए यह 150 बाट का ही है।

कुछ ख़ास बातें
  • बजट देखकर सफ़र पर निकलने वालों के लिए थाईलैंड अगर बेहद सस्ता है, तो थाईलैंड में पात्तया सबसे सस्ते शहरों में है, ख़ासकर ट्रांस्पोर्टेशन के मामले में।
  • टैक्सी, टुक-टुक, पिक-अप... सबके रेट तय हैं। शायद ही कोई आपसे तय कीमत से ज़्यादा पैसे ले। और अगर आप ज़रा-से जागरूक हैं तो यह आशंका भी ख़त्म हो जाती है।
  • टिफेनी शो के लिए टिकट किसी एजेंट से न लेकर सीधे टिफेनी ऑफिस से बुक कराया जाए तो उनकी गाड़ी आपको होटल से लेकर जाएगी।
  • पात्तया में हैं तो सेंक्चुरी ऑफ ट्रुथ जाना न भूलें। यह लकड़ी से बना 344 फीट ऊंचा मंदिर है। यहां की सजावट देखने वाली है। मंदिर अभी पूरा नहीं हुआ है। एक अजब शांति है यहां पर। टिकट 500 बाट है।  
यह यात्रा वृतांत  'दैनिक भास्कर' के हरियाणा, पंजाब एवं दिल्ली संस्करणों के साप्ताहिक परिशिष्ट 'रसरंग' के 19 फरवरी 2012 के अंक में प्रकाशित हुआ है।

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3 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

but Thighland is an indifferent country.

दीपिका रानी said...

बड़े दिन बाद आई यह किस्त। बहुत बढ़िया जानकारी..बधाई

AJAY GARG said...

हां, काजल कुमार जी... थाई लोगों का व्यवहार उदासीनता भरा है.. लेकिन एक तरह से ठीक भी है... हर कोई अपने में मस्त है.. बेकार का हस्तक्षेप नहीं है दूसरों की ज़िंदगी में

दीपिका जी...मैं तो सोचे बैठा था कि कहीं आप इससे पहले वाली किस्त पर ही नहीं लौटी अभी..!!! :) फिर से घुमक्कड़ी पर निकल गया था, इसलिए यह किस्त देर से आई...पात्तया ख़त्म हो गया है, अब अगली किस्त में बैंकॉक पहुंच जाऊंगा...